Tuesday, May 11, 2010

Galti Sudhar Gayee by Jagmohan Azad

Galti Sudhar Gayee by Jagmohan Azad ISBN:978-93-80470-02-3 Review Text : आज़ाद की इन बाल कहानियों में गढ़वाल और कुमाऊं की पथरीली जमीन का अहसास है, वहां के स्कूलों की खामियां-खूबियां भी तो बच्चों के दर्द की अपनी अभिव्यक्ति भी है। इन कहानियों में कई कहानियां मुक्तिकामी चेतना को आवाज़ देने वाली तो है साथ सहज सरल भाषा में बच्चों की सहज सरल कहानियां भी हैं। जिनकी आज के बच्चों को जरूरत है। आज के बच्चे कम्प्यूटर गेम और 'ई' तकनीकी के जिस तरह से दिवाने हो रहे है। ऐसे में गांव-खेत-खलिहाना और दादा-दादी के समय से बच्चों के लिए संस्कार-आदर्श निकालकर इनके सामने रखना जितना चुनौती पूर्ण हैं,यह आज किसी से छुपा नहीं हैं। लेकिन जगमोहन ने अपने पहले बाल काहनी संग्रह 'गलती सुधर गयी' के माध्यम से जिस तरह से इस चुनौती को स्वीकार किया हैं। इसकी निश्चित तौर पर प्रसन्नसा की जानी चाहिए। क्योंकि इन संस्कारों और आदर्शों की आज के बच्चों को बहुत जरूरत हैं।
मूल्य : 80 रूपये
प्रकाशक : कश्यप पब्लिकेशन
बी-48/यू. जी.-4, दिलशाद एक्‍सटेंशन-2 डीएलएफ, गाजियाबाद-05
फोन: 9868778438

Friday, May 7, 2010

santmat by bhagat munshiram

Title: Santmat by bhagat munshiram ISBN: 8190550144 Review Text: "बचपन से ही संत और संतमत जैसे शब्‍द अपनी अलग-अलग छवियों के साथ मन पर बैठतेरहे हैं. संतमत की एक छवि रहस्‍य जैसी भी है जिसे जाना नहीं जा सकता. एक अलौकिकप्रभामंडल जैसी भी है जो लुभाता तो है परन्‍तु उस तक पहुँचना कठिन है. कोईबेपरवाह तेजस्‍वी है जो हर हाल में मस्‍त है. कहीं साधुओं या सत्‍संगियों कीभीड़ पर हवा-सा पसरा बैठा है. कहीं सुधारक, कहीं उद्धारक, कहीं कष्‍ट निवारक, कहींमनोकामना पूरी करने वाला. कहीं किसी धर्मगुरु की मूर्ति, कहीं किसी महात्‍मा काफोटो. इन छवियों का कोई अन्‍त नहीं और सब के सब लडाइयों के धन्‍धे......" प्रकाशक कश्यप पब्लिकेशन बी-48/ यूजी-4, दिलशाद एक्‍टेंशन-II डीएलएफ, गाजियाबाद फोन 09868778438

Friday, April 23, 2010

शास्‍त्रार्थ

रंग लेखन और रंगचर्चा की दष्टि से देखें तो हिन्‍दी नाटकों में विभिन्‍न प्रकार के प्रयोग हो रहे हैं ये प्रयोग सामयिक और सनातन प्रश्‍नों से मुठभेड करते हुए अपनी सार्थकता सिध्‍द करते हैं अब यह चिन्‍ता कुछ कम हो रही है कि हिन्‍दी में मौलिक नाट्रयलेखों का अभाव है वस्‍तुत पिछले दो दशकों में नाट्रयलेखकों और नाट्रय निर्देशकों ने अपनी स‍िक्रियता से हिन्‍दी रंगकर्म को और भास्‍वर किया है शास्‍त्रार्थ इसी कडी में एक मौलिक नाटय रचना है आचार्य शंकर और मंडन मिश्र का शास्‍त्रार्थ बहुविदित है मंडन मिश्र की पत्‍नी शारदा का हस्‍तक्षेप और अमरूक के शरीर में शंकर का परकाया प्रवेश ये ऐसे प्रसंग है जो पाठकों को रोमांचित करते रहे हैं शास्‍त्रार्थ नाटक इसी कथाभूमि पर विकसित है तीन अंकों और दस दरष्‍यों में सुसंयोजित यह रचना रंगमंच के लिए एक नवीन आकर्षण सिध्‍द होगी भारतेन्‍दु मिश्र संस्‍करत साहित्‍य के अध्‍येता है इसलिए शास्‍त्रार्थ में गूढ चिन्‍तन का सहज समावेश हो गया है
पुस्‍तक
शास्‍त्रार्थ
लेखक
भारतेन्‍दु मिश्र
प्रकाशक
कश्‍यप पब्लिकेशन

Nai Roshni: Author: Bhartendu Mishra, ISBN: 8190550187 - A1Books India

Nai Roshni: Author: Bhartendu Mishra, ISBN: 8190550187 - A1Books India

nai roshni

Nai Roshni by Bhartendu Mishra
ISBN - 8190550187
नई रोसनी का कथा फ़लक व्‍यापक है गांव से लेकर देश की राजधानी तक फैला हुआ। कथा का आरम्‍भ होता है बडे भाई रमेसुर के माध्‍यम से जो दिल्‍ली के बार्डर पर स्थिति कलंदर कालोनी में रहते हुए स्‍वयं के चार रिक्‍शों को किराये पर उठाने का धन्‍धा करते हैं और बंटी चौराहे पर स्थिति पांडे पान वाले की पुटपथियां दुकान पर से गांव में रह रहे अपने छोटे भाई का हालचाल लेने के लिए गांव के ठाकुर के घर पर फोन करते हैं कि ठाकुर साहब ३०० रपये माहवार पर उन्‍हीं की सेवा में चौबीसों घंटे की चाकरी करने वाले निरहू को बुला देंा और फिर शुरू होता है उधड रहे स्‍वेटर के फन्‍दों की भांति महमूदाबाद के रामपुर के निकट स्थित गांव धांधी के अन्‍तर्ससार के तलछट का कुरूप सत्‍य ......... पुस्‍तक नई रोसनी लेखक भारतेन्‍दु मिश्र रूपये 60 रूपये प्रकाशक कश्यप पब्लिकेशन बी-48/ यूजी-4, दिलशाद एक्‍टेंशन-II डीएलएफ, गाजियाबाद फोन 09868778438